Saturday, 26 March 2011

कोई तो इनकी कसो नकेल

लूट खसोट और धक्कम पेल
संसद में चल रहा ये खेल 
देखो बन्दर बाँट चल रही
कोई तो इनकी कसो नकेल

सीना जोरी खींचा तानी
इनके राजा इनकी रानी
खुलेआम बिकते अधिकारी 
मंत्री संत्री या चपराशी
कोई नब्बे कोई उन्नासी
सरेआम अब दे दो फांसी
संसद पर से दो इनको धकेल
कोई तो इनकी कसो नकेल

लोक लाज परवाह नहीं हैं
कुर्सी छोड़ कोई चाह नहीं हैं
नेता मंत्री चोर उच्चके
फर्क की कोई राह नहीं हैं
भेज दो सबको मंडाले जेल
कोई तो इनकी कसो नकेल

Thursday, 10 March 2011

पुलिस महकमा इतना नाकाम क्यूँ हैं ?


दिन दहाड़े हुए राधिका तंवर हत्याकांड ने मन को फिर एक बार झकझोर दिया हैं , व्यवस्था इतनी लचर क्यूँ हैं ? पुलिस महकमा इतना नाकाम क्यूँ हैं ?


पुलिस वाले मोटर साईकिल से पीछा करते हैं गाडी चलाते हुए मोबाईल पे बात करने वालो का , शरीफ सभ्रांत व्यापारियों , व्यवसायियों , नौकरीपेशा लोगो को तंग करते हैं / पर वही अपराधी उसी दिल्ली की सड़क पे काले सीसे वाली गाड़ी में बलात्कार करता फिरता हैं / क्या ज्यादा जरुरी हैं बिना ड्राइविंग लाईसेंस के गाड़ी चलने वाले को पकड़ना या जेब में रिवाल्वर लेकर चलने वाले को पकड़ना / क्यूँ दिल्ली की सडको से काली फिल्म चढ़ी सिसो वाली गाड़िया बे रोक टोक चल रही हैं / क्युकी उससे पुलिस वालो की आमदनी होती हैं / पुलिस वालो को शायद इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की उन काले सिसो के पीछे क्या हो रहा हैं /


अपराधी सरे बाजार एक के बाद एक लडकियों के चेहरे पर चाकू से वार कर जाता हैं, तेज़ाब फेंक जाता हैं और पुलिस को अपराधी मिलता ही नहीं / आरुशी हत्याकांड पुलिस की निकर्मंयता का जीता जागता प्रमाण हैं / पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाना होगा / अपनी कार्यप्रणाली में प्राथमिकता तय करनी होगी / ऍफ़ आई आर लिखना केन्द्रीयकृत करना होगा / सभी थानों का computerisation करना होगा / घूसखोरी का त्याग करना होगा / पुलिस वालो को सभी तरह के अपराधी पकड़ने के लिए पुरस्कार का प्रचलन करना होगा /

Friday, 6 November 2009

तुम आग हो

तुम आग हो ,
तुम्हे सुलगना नहीं
जलना हैं
ताप देना हैं
सारे जहाँ को
घुट घुट कर सांस लेना
तुम्हारी प्रकृति नहीं
ऊर्जा हो तुम
युवा
तुम्हारे रक्त की उष्णता
सिर्फ प्रेयसी को उन्मादित करने के लिए नहीं
इसके बहुत से प्रयोजन हैं
राष्ट्र, समाज,
ताक रहे हैं तुम्हारी ओर
कब जलाओगे
भ्रष्टाचार और आतंकवाद की लाश ?

Saturday, 13 June 2009

रविवार सुबह की दिमागी कसरत

गुड मोर्निंग इंडिया । नींद टूटे हुए १ घंटे हो गए । रात सोते वक्त मैंने पत्नी से कहा था की मुझे सुबह सोने देना देर तक , काफ़ी दिन हुए चैन से नही सो पा रहा। आजकल रविवार तो हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन हो गया हैं। एक रविवार और कितने काम। आदमी दिनचर्या तो बनता हैं पर उसपर अमल करना वास्तव में बहुत आसान नही हैं। क्युकि आदमी ख़ुद पर नियंत्रण कर सकता हैं लेकिन उसकी निर्भरता बहुत बढ़ चुकी हैं।

आज मेरी नींद पक्षियो के चहचहाहट से खुली । आप सोचोगे की दिल्ली में और पक्षियो की चहचहाहट ? एन डी पि एल वालो ने नया मीटर लगाया हैं डिजीटल और पुराना मीटर का डिब्बा अपना स्थान जमाये हुए हैं। एक चिडिया ने उसपर अपना कब्जा जमाया और अपना घोसला सजा लिया। एम् सी डी वाले प्लीज उन्हें प्रोपर्टी टैक्स के दायरे में न लाये। ना ही अनाध्रिकृत निर्माण ही घोषित करे। दिल्ली में घोसला बनाने की सोचना भी मध्यम वर्ग के वश की बात नही । कहीं से जोड़ तोड़ कर किसी अनाध्रिकृत जमीं पर , किसी अघोषित कालोनी में ३०-४० गज में अपना मकान बनाता तो हैं पर एम् सी डी का बुलडोजर उसे हमेशा सपनो में डराता रहता हैं। सरकारी अधिकृत प्लाटो फ्लेटो और झुग्गियो तक की ऐसे बंदरबांट होती हैं की अब तो एक आम इंसान फार्म भरने से कतराने लगा हैं। डी डी ऐ १००० फ्लेटो के लिए १००००० फार्म बेचता हैं १०० रुपयों की कीमत से , १ करोड़ तो सिर्फ़ फार्म बेचकर आ गए । अब तो मुझे एक बात और समझ आती हैं क्या इनकी बेंको के साथ भी सांठ गाँठ हैं ? बैंक ब्याज काफ़ी बनाते हैं इन हाऊसिंग स्कीम से । अगर एप्लिकेशन मनी ५०,००० हैं तो कुल डिपॉजिट पाँच अरब रुपये। ये सारे पैसे बैंक में ही रहते हैं जब तक draw न हो। कम से कम ६ महीने। अब कुछ सोचने की नही करने की जरूरत हैं। सी बी आई, इनकम टेक्स, और इकोनोमिक्स आफेंस विंग आप सब इस बन्दर बाँट में सामिल हैं या नही खुदा जाने, पर जनता ठगी जा रही हैं हर दिन।

हाँ तो मैं पक्षियो के और उनके घोसलों की बात कर रहा था। मैंने गौरैया का घोसला देखा हैं और कौवे का भी। कौवे के घोसले में कोयल का अंडे सेना भी। मेरे घर के मीटर अपार्टमेन्ट में रहने वाली चिडिया दो हफ्ते पहले घायल हो गई थी, सायद किसी बिल्ली के हत्थे चढ़ गई हो, यहाँ सब एक दूसरे के जान के दुसमन ही तो हैं। बिल्ली तो बिचारी फ़िर भी बुद्धिविहीन जानवर हैं , इनको देखिये ओसामा ओबामा तालिबान पकिस्तान , हे भगवान् ? भगवन कुछ तो करो या तो इलाज या विनाश । मैंने उस चिडिया को उठाकर पानी पिलाया , उसके एक पैर में गंभीर चोट थी। मैंने उसे सहलाया और प्यार से पुकारा उसने आँखें खोली, आँखों में नमी सी दिखीमुझे ये नही पता की चिडिया रोटी भी हैं या नही पर उसकी आंखों से दर्द टपक रहा था। जैसे ही वो थोड़ा रिलेक्स हुयी झट से उड़ गई, मन ही मन सोचा होगा इंसान हैं क्या भरोषा। मुझे थोड़ा अखरा भी । दूसरे दिन से मैं रोज उसके घोसले में उसे देखने की कोसिस करता , ज्यादातर मेरी और उसकी टाइमिंग मैच नही करती थी। वो सुबह जल्दी काम पर चली जाती और जल्दी ही आकर सो जाती। मैं तो वही अपनी रूटीन निभाता १० बजे जाना और १० बजे आना। रात में जब भी आता मोबाइल की लाइट से उसे देखने की कोसिस करता । मेरी हाईट कुछ कम हैं तो मुझे घोसले के अन्दर सोयी चिडिया न दिखती फ़िर मैं फ्लैश लाइट आन करके हाथ लंबा उठाकर घोसले के अन्दर की तस्वीर लेता। करुना और प्यार की भाषा सभी समझते हैं शायद। अब वो चिडिया मेरे से हिल मिल गई हैं, अब मुझे देखकर नही डरती, बहुत शोर मचाने लगी हैं। ज्यादा प्यार भय हीन करता हैं, अनुसाशन तोड़ता हैं ।

वाइफ उठ चुकी हैं, कहेगी अब सुबह सुबह लेपटोप लेकर बैठ जाते हो ये नही जरा पार्क टहल आए, जरा व्यायाम ही कर ले। वो ये थोडी सोचती हैं की दिमागी कसरत हो रही ।

Thursday, 11 June 2009

माँ काश तुमने मुझे सिखाया होता

माँ काश तुमने मुझे सिखाया होता
झूठ बोलने का हुनर
थोडी सी मक्कारी
जीने का तरीका
जो चलता हैं आजकल
चापलूसी करने की कला
मन के हाव भाव
चेहरे तक आने न देने का सऊर
सलीका अनजान बनने का
करके भूल
कम से कम इतना तो सिखाया होता
कैसे कड़वे सच को
मीठा किया जाता हैं .
आज किसीने प्रश्न किया हैं
तेरे प्यारे बेटे से
क्या सिखा हैं तुमने
बताओ ना माँ
क्या जवाब दूं ?

Tuesday, 9 June 2009

शून्य मेरे दोस्त

मैं शून्य हूँ
तुम भी शून्य हो जाओ
हम जुड़कर भी शून्य
और घटकर भी शून्य
और कोई अगर गुणा करे
तो भी सिफर शून्य
पर कोई बाँटना चाहे हमे
करना चाहे विभाजित
असंभव
हम एक दुसरे से अविभाज्य रहे
हमेशा हमेशा

मतदाता, क्रिकेट की बाल

क्रिकेट के बाल को
कभी ये समझ ना आया
की उसकी ये दुर्दशा क्यूँ हैं
क्यूँ फेंका जाता हैं
क्यूँ झन्नाटे से फफेडा जाता

क्यूँ उछाला जाता हैं,
क्यूँ फ़िर थामा जाता हैं
बड़े प्यार से,
चूमता हैं , प्यार से सहलाता हैं
गेंद बाज
बलि के बकरे की तरह।
क्रिकेट के बाल के बिना
रन कैसे बनेगे भाई ?