Thursday, 7 April 2011

भीड़ नहीं जन सैलाब हैं


सत्ता के नशे में मदमस्त सरकार की नींद टूट गयी , थोड़ी सी खुमारी बाकी हैं सुबह तक वो भी छंट जाएगी / सोनिया जी भी जाग गयी, अनशन के तीसरे दिन उन्हें अन्नाजी के अनशन से दुःख हुआ / पहले दो दिन कहाँ थी वो ? राहुल बाबा को तो अभी तक पता भी नहीं चला की दिल्ली में गद्दी हिलने लगी हैं वो चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं / कितने नाटकबाज होते हैं ये नेता और मंत्री / आज सुषमा स्वराज ट्विट्टर पे समर्थन कर रही हैं नरेन्द्र मोदी अन्ना जी की तुलना श्री जयप्रकाश नारायण जी से कर रहे हैं / कल तक कहाँ घुसे हुए थे सब के सब / आपस में विचार विमर्श कर रहे थे "बुड्ढा सठिया गया हैं " "दो चार दिन भूखे रहेगा अपने आप मान जायेगा " / कोई प्रलोभन दे देगे / किसी कमेटी का मेम्बर अध्यक्ष बना देंगे / उन्हें ये कहाँ पता था की " ये अन्ना नहीं आंधी हैं युग का दूसरा गाँधी हैं " / उन्हें ये नहीं पता था की ये जिद्दी बुड्ढा उनकी गन्दी कौम का नहीं , वो भ्रष्ट नेता नहीं जो बिक जाते हैं /

आजादी के आन्दोलन के बाद ये देश का सबसे बड़ा जन-आन्दोलन हैं / इसमें भीड़ प्रलोभन से इक्कठी नहीं की गयी , प्रदर्शन के लिए लोगो को किराये पे नहीं लाया गया / न किसी सरकारी तंत्र का दुरूपयोग करके भीड़ इक्कठी की गयी हैं / यहाँ स्वत: स्फूर्त भीड़ हैं , भीड़ नहीं जन सैलाब हैं / सिर्फ दिल्ली में नहीं देश के सभी शहरों में / और अगर ये आन्दोलन कुछ दिन और चल गया तो अंग्रेजो भारत छोड़ो वाले दिन फिर एक बार भारत देखेगा / जिस तरह से युवा वर्ग श्री अन्ना के प्रति समर्पित भाव से इस आन्दोलन में भागेदारी ले रहे हैं एक नया शांतिपूर्ण विप्लव स्वाभाविक हैं अगर सरकार नहीं चेती तो /

केंद्र सरकार अगर अपनी छवि बचाना चाहती हैं तो

(क) तत्काल प्रभाव से अपने दागी मंत्रियो की छुट्टी कर दे
(ख) भ्रष्ट अफसरों को अवकाश पर भेज दे
(ग) अन्ना के साथ साँझा भागीदारी में एक जन लोकपाल विधेयक प्रारूप समिति बनाले

अगर जनता को सरकार के कृत्य में सच्चाई और इमानदारी दिखाई दी तो सरकार चलेगी नही तो ये आंधी नहीं रुकेगी / भारत की जनता को श्री अन्ना ने नयी रौशनी दी हैं / आज की युवा पीढ़ी जो महात्मा गाँधी के "एक गाल पर कोई थप्पड़ मरे तो दूसरा गाल भी आगे करदो " के सिद्धांत से एक मत नहीं रखती थी , जिन्हें अहिंसा की ताक़त का अंदाजा नहीं था , जिन्हें गाँधी जी का सत्याग्रह के बल का कोई इल्म नहीं था , उस युवा पीढ़ी को अन्ना ने गांधीजी और उनके सिद्धांतो की प्रासंगिकता समझाई हैं / और मुझे ये देखकर बहुत आनंद का अनुभव हो रहा हैं की जो युवा दिल्ली की सडको पर , इंडिया गेट पर बाईक्स पर स्टंट करते नजर आते हैं वही युवा आज केंडल मार्च में "रघुपति राघव राजा राम पतित पवन सीता राम " कोरस में गाते चले जा रहे हैं / जय हिंद

Wednesday, 6 April 2011

एक दिन तो देश के नाम कीजिये /


मेरे दोस्तों एक 70 साल का वृद्ध व्यक्ति महाराष्ट्र से चलकर आया हैं आपके शहर हम सब के लिए/ हमारे भविष्य के लिए, देश के लिए , भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए / भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए कड़े कानून बनाने की सख्त आवश्यकता हैं / पर पिछले 62 वर्ष में एक भी कानून पास नहीं हुआ संसद में जो करप्सन के विरुद्ध हो / करप्सन के खिलाफ देश में कोई सख्त कानून नहीं हैं / बड़े से बड़ा भ्रष्टाचारी भी ३-४ साल की जेल काटने के बाद हजारो करोड़ के घोटाले से अर्जित धन का स्वामी बन सकता हैं / इस देश में १०० रुपये की रिश्वत लेने वाला तो 17 साल कोर्ट में केस लड़ने के बाद १ महीने की कैद की सजा पाता हैं और दूसरी तरफ हजारो करोड़ के घपले बाज कानून की कमियों का फायदा उठाकर न्याय का बलात्कार करते फिरते हैं /
ये
शराब में मिलावट तो बड़ी आम सी बात हो गयी हैं / नकली शराब पीकर मरने वालो को समाज भी ताने देता हैं , ठीक हुआ मर गया साला / पर नवरात्री में माता के व्रत के आहार में मिलावट इसको क्या कहेगे आप ? कुट्टू के आटे की बनी रोटिया खाकर सैकड़ो लोग बीमार पद गए कौन जवाब देह हैं / जनता इस मिलावट को कैसे चेक करे ? खाद्य विभाग तो खाने में व्यस्त हैं , ऍफ़ सी आई के गोदामों में रासन सड़ रहा हैं / करोडो लोगो को दो वक़्त का भोजन नसीब नहीं हैं / अम्बानी बंधू सारे देश के वाणिज्य व्यापार पर एक छत्र अधिकार करने में लगे हुए हैं / सरकार देश की लुटिया डुबोने में आमादा हैं / अब तो सोचिये , एक दिन तो देश के नाम कीजिये / जंतर मंतर आईये सपरिवार /

ये आग नहीं बुझेगी ....नहीं बुझेगी...नहीं बुझेगी


जंतर मंतर से अभी घर पहुंचा हूँ / कमाल कर दिया हैं श्री अन्ना हजारे जी ने / देश के जनमानस की आवाज बन गए हैं / जंतर मंतर में जन सैलाब उमड़ पड़ा हैं /
युवक युवतिया, वृद्ध जवान , व्यवसायी नौकरी पेशा, रिक्शा चालक , रेड़ी पटरी वाले, किसान , रिटायर्ड सैनिक , डॉक्टर सभी एक ही मंच के नीचे निसंकोच दरी पर बैठे हुए अन्ना को सुन रहे हैं, भजन और देश भक्ति गीत गा रहे हैं / देखकर अनुभव हो रहा हैं की गांधीजी की संध्या सभा और अनशन कैसे होते होगे /

अन्ना जी आपके ऊपर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गयी हैं / देश के नौजवानों में जो जोश और जूनून आपके इस आन्दोलन में देखा जा रहा हैं वो दिल्ली के इतिहास में अभूतपूर्व हैं / युवा वर्ग आपको एक नयी आशा की किरण के रूप में देख रहा हैं / जो युवा उकता गया था भारत की राजनीती से , उसे घिन आती थी राजनेताओ से , जो नफरत करते थे मंत्रियो से एम् एल ए, एम् पिए से वो युवा कंधे से कन्धा मिलाकर चिल्ला रहे हैं " अन्ना आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं " / ये जो थोडा सा भरोशा आपने जनमानस विशेषकर युवा वर्ग में जागृत किया हैं ये एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी हैं आप पर / अगर युवा वर्ग आपसे भी निराश हुए तो उनका विश्वाश इस राजनैतिक सिस्टम से ही उठ जाएगा /

बहुत से राजनेता अन्ना से मिलने आ रहे हैं लेकिन अन्ना को उन्हें अपने से दूर ही रखना होगा वर्ना जो जनसमर्थन उन्हें हासिल हो रहा हैं वो नहीं होगा/ जनता के मन में व्याप्त भ्रष्ट तंत्र के प्रति आक्रोश को देश व्यापी जन आन्दोलन में परिवर्तित हो रहा हैं / उत्तरी भारत से तो जाने कितने लोग मायानगरी हीरो बन ने जाते हैं पर अन्ना पहले व्यक्ति हैं जो मुंबई से दिल्ली आकर सारे देश के हीरो बन गए हैं / हमने आज जंतर मंतर से इंडिया गेट और इंडिया गेट से कस्तूरबा गाँधी मार्ग होते हुए जंतर मंतर तक "मौन दीप यात्रा " (candle march) किया / कालेज के दिनों की यादे ताजा हो गयी जब हम नारे लगते थे " ये आग नहीं बुझेगी ....नहीं बुझेगी...नहीं बुझेगी "
अगर देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना हैं तो ये चिंगारी बुझनी नहीं चाहिए / इसे दावानल बना दीजिये और समूचे भ्रष्ट तंत्र को स्वाहा कीजिये / जय हिंद

Saturday, 26 March 2011

कोई तो इनकी कसो नकेल

लूट खसोट और धक्कम पेल
संसद में चल रहा ये खेल 
देखो बन्दर बाँट चल रही
कोई तो इनकी कसो नकेल

सीना जोरी खींचा तानी
इनके राजा इनकी रानी
खुलेआम बिकते अधिकारी 
मंत्री संत्री या चपराशी
कोई नब्बे कोई उन्नासी
सरेआम अब दे दो फांसी
संसद पर से दो इनको धकेल
कोई तो इनकी कसो नकेल

लोक लाज परवाह नहीं हैं
कुर्सी छोड़ कोई चाह नहीं हैं
नेता मंत्री चोर उच्चके
फर्क की कोई राह नहीं हैं
भेज दो सबको मंडाले जेल
कोई तो इनकी कसो नकेल

Thursday, 10 March 2011

पुलिस महकमा इतना नाकाम क्यूँ हैं ?


दिन दहाड़े हुए राधिका तंवर हत्याकांड ने मन को फिर एक बार झकझोर दिया हैं , व्यवस्था इतनी लचर क्यूँ हैं ? पुलिस महकमा इतना नाकाम क्यूँ हैं ?


पुलिस वाले मोटर साईकिल से पीछा करते हैं गाडी चलाते हुए मोबाईल पे बात करने वालो का , शरीफ सभ्रांत व्यापारियों , व्यवसायियों , नौकरीपेशा लोगो को तंग करते हैं / पर वही अपराधी उसी दिल्ली की सड़क पे काले सीसे वाली गाड़ी में बलात्कार करता फिरता हैं / क्या ज्यादा जरुरी हैं बिना ड्राइविंग लाईसेंस के गाड़ी चलने वाले को पकड़ना या जेब में रिवाल्वर लेकर चलने वाले को पकड़ना / क्यूँ दिल्ली की सडको से काली फिल्म चढ़ी सिसो वाली गाड़िया बे रोक टोक चल रही हैं / क्युकी उससे पुलिस वालो की आमदनी होती हैं / पुलिस वालो को शायद इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की उन काले सिसो के पीछे क्या हो रहा हैं /


अपराधी सरे बाजार एक के बाद एक लडकियों के चेहरे पर चाकू से वार कर जाता हैं, तेज़ाब फेंक जाता हैं और पुलिस को अपराधी मिलता ही नहीं / आरुशी हत्याकांड पुलिस की निकर्मंयता का जीता जागता प्रमाण हैं / पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाना होगा / अपनी कार्यप्रणाली में प्राथमिकता तय करनी होगी / ऍफ़ आई आर लिखना केन्द्रीयकृत करना होगा / सभी थानों का computerisation करना होगा / घूसखोरी का त्याग करना होगा / पुलिस वालो को सभी तरह के अपराधी पकड़ने के लिए पुरस्कार का प्रचलन करना होगा /

Friday, 6 November 2009

तुम आग हो

तुम आग हो ,
तुम्हे सुलगना नहीं
जलना हैं
ताप देना हैं
सारे जहाँ को
घुट घुट कर सांस लेना
तुम्हारी प्रकृति नहीं
ऊर्जा हो तुम
युवा
तुम्हारे रक्त की उष्णता
सिर्फ प्रेयसी को उन्मादित करने के लिए नहीं
इसके बहुत से प्रयोजन हैं
राष्ट्र, समाज,
ताक रहे हैं तुम्हारी ओर
कब जलाओगे
भ्रष्टाचार और आतंकवाद की लाश ?

Saturday, 13 June 2009

रविवार सुबह की दिमागी कसरत

गुड मोर्निंग इंडिया । नींद टूटे हुए १ घंटे हो गए । रात सोते वक्त मैंने पत्नी से कहा था की मुझे सुबह सोने देना देर तक , काफ़ी दिन हुए चैन से नही सो पा रहा। आजकल रविवार तो हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन हो गया हैं। एक रविवार और कितने काम। आदमी दिनचर्या तो बनता हैं पर उसपर अमल करना वास्तव में बहुत आसान नही हैं। क्युकि आदमी ख़ुद पर नियंत्रण कर सकता हैं लेकिन उसकी निर्भरता बहुत बढ़ चुकी हैं।

आज मेरी नींद पक्षियो के चहचहाहट से खुली । आप सोचोगे की दिल्ली में और पक्षियो की चहचहाहट ? एन डी पि एल वालो ने नया मीटर लगाया हैं डिजीटल और पुराना मीटर का डिब्बा अपना स्थान जमाये हुए हैं। एक चिडिया ने उसपर अपना कब्जा जमाया और अपना घोसला सजा लिया। एम् सी डी वाले प्लीज उन्हें प्रोपर्टी टैक्स के दायरे में न लाये। ना ही अनाध्रिकृत निर्माण ही घोषित करे। दिल्ली में घोसला बनाने की सोचना भी मध्यम वर्ग के वश की बात नही । कहीं से जोड़ तोड़ कर किसी अनाध्रिकृत जमीं पर , किसी अघोषित कालोनी में ३०-४० गज में अपना मकान बनाता तो हैं पर एम् सी डी का बुलडोजर उसे हमेशा सपनो में डराता रहता हैं। सरकारी अधिकृत प्लाटो फ्लेटो और झुग्गियो तक की ऐसे बंदरबांट होती हैं की अब तो एक आम इंसान फार्म भरने से कतराने लगा हैं। डी डी ऐ १००० फ्लेटो के लिए १००००० फार्म बेचता हैं १०० रुपयों की कीमत से , १ करोड़ तो सिर्फ़ फार्म बेचकर आ गए । अब तो मुझे एक बात और समझ आती हैं क्या इनकी बेंको के साथ भी सांठ गाँठ हैं ? बैंक ब्याज काफ़ी बनाते हैं इन हाऊसिंग स्कीम से । अगर एप्लिकेशन मनी ५०,००० हैं तो कुल डिपॉजिट पाँच अरब रुपये। ये सारे पैसे बैंक में ही रहते हैं जब तक draw न हो। कम से कम ६ महीने। अब कुछ सोचने की नही करने की जरूरत हैं। सी बी आई, इनकम टेक्स, और इकोनोमिक्स आफेंस विंग आप सब इस बन्दर बाँट में सामिल हैं या नही खुदा जाने, पर जनता ठगी जा रही हैं हर दिन।

हाँ तो मैं पक्षियो के और उनके घोसलों की बात कर रहा था। मैंने गौरैया का घोसला देखा हैं और कौवे का भी। कौवे के घोसले में कोयल का अंडे सेना भी। मेरे घर के मीटर अपार्टमेन्ट में रहने वाली चिडिया दो हफ्ते पहले घायल हो गई थी, सायद किसी बिल्ली के हत्थे चढ़ गई हो, यहाँ सब एक दूसरे के जान के दुसमन ही तो हैं। बिल्ली तो बिचारी फ़िर भी बुद्धिविहीन जानवर हैं , इनको देखिये ओसामा ओबामा तालिबान पकिस्तान , हे भगवान् ? भगवन कुछ तो करो या तो इलाज या विनाश । मैंने उस चिडिया को उठाकर पानी पिलाया , उसके एक पैर में गंभीर चोट थी। मैंने उसे सहलाया और प्यार से पुकारा उसने आँखें खोली, आँखों में नमी सी दिखीमुझे ये नही पता की चिडिया रोटी भी हैं या नही पर उसकी आंखों से दर्द टपक रहा था। जैसे ही वो थोड़ा रिलेक्स हुयी झट से उड़ गई, मन ही मन सोचा होगा इंसान हैं क्या भरोषा। मुझे थोड़ा अखरा भी । दूसरे दिन से मैं रोज उसके घोसले में उसे देखने की कोसिस करता , ज्यादातर मेरी और उसकी टाइमिंग मैच नही करती थी। वो सुबह जल्दी काम पर चली जाती और जल्दी ही आकर सो जाती। मैं तो वही अपनी रूटीन निभाता १० बजे जाना और १० बजे आना। रात में जब भी आता मोबाइल की लाइट से उसे देखने की कोसिस करता । मेरी हाईट कुछ कम हैं तो मुझे घोसले के अन्दर सोयी चिडिया न दिखती फ़िर मैं फ्लैश लाइट आन करके हाथ लंबा उठाकर घोसले के अन्दर की तस्वीर लेता। करुना और प्यार की भाषा सभी समझते हैं शायद। अब वो चिडिया मेरे से हिल मिल गई हैं, अब मुझे देखकर नही डरती, बहुत शोर मचाने लगी हैं। ज्यादा प्यार भय हीन करता हैं, अनुसाशन तोड़ता हैं ।

वाइफ उठ चुकी हैं, कहेगी अब सुबह सुबह लेपटोप लेकर बैठ जाते हो ये नही जरा पार्क टहल आए, जरा व्यायाम ही कर ले। वो ये थोडी सोचती हैं की दिमागी कसरत हो रही ।