Thursday, 7 April 2011
भीड़ नहीं जन सैलाब हैं
Wednesday, 6 April 2011
एक दिन तो देश के नाम कीजिये /
ये आग नहीं बुझेगी ....नहीं बुझेगी...नहीं बुझेगी
Saturday, 26 March 2011
कोई तो इनकी कसो नकेल
सीना जोरी खींचा तानी
Thursday, 10 March 2011
पुलिस महकमा इतना नाकाम क्यूँ हैं ?
Friday, 6 November 2009
तुम आग हो
तुम्हे सुलगना नहीं
जलना हैं
ताप देना हैं
सारे जहाँ को
घुट घुट कर सांस लेना
तुम्हारी प्रकृति नहीं
ऊर्जा हो तुम
युवा
तुम्हारे रक्त की उष्णता
सिर्फ प्रेयसी को उन्मादित करने के लिए नहीं
इसके बहुत से प्रयोजन हैं
राष्ट्र, समाज,
ताक रहे हैं तुम्हारी ओर
कब जलाओगे
भ्रष्टाचार और आतंकवाद की लाश ?
Saturday, 13 June 2009
रविवार सुबह की दिमागी कसरत
गुड मोर्निंग इंडिया । नींद टूटे हुए १ घंटे हो गए । रात सोते वक्त मैंने पत्नी से कहा था की मुझे सुबह सोने देना देर तक , काफ़ी दिन हुए चैन से नही सो पा रहा। आजकल रविवार तो हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन हो गया हैं। एक रविवार और कितने काम। आदमी दिनचर्या तो बनता हैं पर उसपर अमल करना वास्तव में बहुत आसान नही हैं। क्युकि आदमी ख़ुद पर नियंत्रण कर सकता हैं लेकिन उसकी निर्भरता बहुत बढ़ चुकी हैं।
आज मेरी नींद पक्षियो के चहचहाहट से खुली । आप सोचोगे की दिल्ली में और पक्षियो की चहचहाहट ? एन डी पि एल वालो ने नया मीटर लगाया हैं डिजीटल और पुराना मीटर का डिब्बा अपना स्थान जमाये हुए हैं। एक चिडिया ने उसपर अपना कब्जा जमाया और अपना घोसला सजा लिया। एम् सी डी वाले प्लीज उन्हें प्रोपर्टी टैक्स के दायरे में न लाये। ना ही अनाध्रिकृत निर्माण ही घोषित करे। दिल्ली में घोसला बनाने की सोचना भी मध्यम वर्ग के वश की बात नही । कहीं से जोड़ तोड़ कर किसी अनाध्रिकृत जमीं पर , किसी अघोषित कालोनी में ३०-४० गज में अपना मकान बनाता तो हैं पर एम् सी डी का बुलडोजर उसे हमेशा सपनो में डराता रहता हैं। सरकारी अधिकृत प्लाटो फ्लेटो और झुग्गियो तक की ऐसे बंदरबांट होती हैं की अब तो एक आम इंसान फार्म भरने से कतराने लगा हैं। डी डी ऐ १००० फ्लेटो के लिए १००००० फार्म बेचता हैं १०० रुपयों की कीमत से , १ करोड़ तो सिर्फ़ फार्म बेचकर आ गए । अब तो मुझे एक बात और समझ आती हैं क्या इनकी बेंको के साथ भी सांठ गाँठ हैं ? बैंक ब्याज काफ़ी बनाते हैं इन हाऊसिंग स्कीम से । अगर एप्लिकेशन मनी ५०,००० हैं तो कुल डिपॉजिट पाँच अरब रुपये। ये सारे पैसे बैंक में ही रहते हैं जब तक draw न हो। कम से कम ६ महीने। अब कुछ सोचने की नही करने की जरूरत हैं। सी बी आई, इनकम टेक्स, और इकोनोमिक्स आफेंस विंग आप सब इस बन्दर बाँट में सामिल हैं या नही खुदा जाने, पर जनता ठगी जा रही हैं हर दिन।
हाँ तो मैं पक्षियो के और उनके घोसलों की बात कर रहा था। मैंने गौरैया का घोसला देखा हैं और कौवे का भी। कौवे के घोसले में कोयल का अंडे सेना भी। मेरे घर के मीटर अपार्टमेन्ट में रहने वाली चिडिया दो हफ्ते पहले घायल हो गई थी, सायद किसी बिल्ली के हत्थे चढ़ गई हो, यहाँ सब एक दूसरे के जान के दुसमन ही तो हैं। बिल्ली तो बिचारी फ़िर भी बुद्धिविहीन जानवर हैं , इनको देखिये ओसामा ओबामा तालिबान पकिस्तान , हे भगवान् ? भगवन कुछ तो करो या तो इलाज या विनाश । मैंने उस चिडिया को उठाकर पानी पिलाया , उसके एक पैर में गंभीर चोट थी। मैंने उसे सहलाया और प्यार से पुकारा उसने आँखें खोली, आँखों में नमी सी दिखीमुझे ये नही पता की चिडिया रोटी भी हैं या नही पर उसकी आंखों से दर्द टपक रहा था। जैसे ही वो थोड़ा रिलेक्स हुयी झट से उड़ गई, मन ही मन सोचा होगा इंसान हैं क्या भरोषा। मुझे थोड़ा अखरा भी । दूसरे दिन से मैं रोज उसके घोसले में उसे देखने की कोसिस करता , ज्यादातर मेरी और उसकी टाइमिंग मैच नही करती थी। वो सुबह जल्दी काम पर चली जाती और जल्दी ही आकर सो जाती। मैं तो वही अपनी रूटीन निभाता १० बजे जाना और १० बजे आना। रात में जब भी आता मोबाइल की लाइट से उसे देखने की कोसिस करता । मेरी हाईट कुछ कम हैं तो मुझे घोसले के अन्दर सोयी चिडिया न दिखती फ़िर मैं फ्लैश लाइट आन करके हाथ लंबा उठाकर घोसले के अन्दर की तस्वीर लेता। करुना और प्यार की भाषा सभी समझते हैं शायद। अब वो चिडिया मेरे से हिल मिल गई हैं, अब मुझे देखकर नही डरती, बहुत शोर मचाने लगी हैं। ज्यादा प्यार भय हीन करता हैं, अनुसाशन तोड़ता हैं ।
वाइफ उठ चुकी हैं, कहेगी अब सुबह सुबह लेपटोप लेकर बैठ जाते हो ये नही जरा पार्क टहल आए, जरा व्यायाम ही कर ले। वो ये थोडी सोचती हैं की दिमागी कसरत हो रही ।