आओ कुछ तो नया करे
चलो हम जिंदगी को उलझाते हैं,
लोग कहते हैं की सबसे अहम् रुपैया हैं
हम उसे जरुरत मंदों को बाँट आते
सपने हमने देखे हैं
कुछ धुंधले ख्वाब उसने भी देखे होंगे
कुछ करे की सच हो हर सपना
उन का
अपने ख्वाब ताक पर रख आते हैं
पंडितो को जीमा जीमा कर थक गए
कोई तकदीर ना बदली
इस बार ऑफिस का मुहूर्त
किसी मासूम बच्चे से निकलवाते हैं
रेलवे फाटक के पास जो मलिन बस्ती हैं
वहां से मेहमान बुलाते हैं
चलो थोडी चोरी करते हैं मुस्कराहट
अपने लिए
चलो गमो से दूर चले जाते हैं
तुम्हारे घर के पास
एक अनाथालय हैं
आज ऐतवार हैं, हम पैदल चले
बच्चो को गाड़ी दे आते हैं
Thursday, 28 May 2009
Monday, 18 May 2009
भारत की जनता ने अपनी राजनैतिक परिपक्वता का उदहारण पेश कर दिया। कांग्रेस को मजबूत स्थिति देकर जनता ने साफ़ soothri और स्थिर सरकार के लिए अपना जनादेश दिया हैं। पिछले आम chunaav me sonia गाँधी का tyaag और पूरे karykaal sonia, rahul और priyanka का कुर्सी का मोह न दिखाना iss बार congress को अच्छी badhat दे गया।
Rahul गाँधी और युवा कांग्रेस की नौजवानों को राजनीती में जोड़ने की कोशिस काबिले तारीफ़ हैं । भारतीय राजनीती का आमूल चूल परिवर्तन युवाओ से ही अपेक्षित हैं।
Rahul गाँधी और युवा कांग्रेस की नौजवानों को राजनीती में जोड़ने की कोशिस काबिले तारीफ़ हैं । भारतीय राजनीती का आमूल चूल परिवर्तन युवाओ से ही अपेक्षित हैं।
Friday, 31 October 2008
असम,पर इस्लामी आतंकवाद का हमला
असम, सारा उत्तर पूर्वी भारत हमेशा आतंकवाद का दंश झेलता रहा हैं। पृथकतावादी ताकते इन प्रदेशो में पिछले ४ दशको से काबिज हैं। एन एस सी एन , मिजो नेशनल लिबरेशन फ्रंट , उल्फा, बोडो और दूसरे छोटे छोटे उग्रपंथी दल पिछले सालो में हमेशा आतंकी कारनामे अंजाम देते रहे हैं। पर ३०/१०/२००८ का सीरियल बोम्ब ब्लास्ट पिछले सारे आतंकी गतिविधियो से पृथक हैं। इसबार असम पर इस्लामी आतंकवाद का हमला हुआ हैं जो की गंभीर चिंता का विषय हैं।
उत्तर पूर्वी राज्यों में अवैध्य विदेशियो विशेषकर बंगलादेशी मुशलमानो की संख्या बढती जा रही हैं। अनाधिकार सीमा पार से अनुप्रवेश जारी हैं। कुकुरमुत्तो की तरह मस्जिद और मदर्शे उग रहे हैं। रिमोट इलाको में, गहरे घने जंगलो में बसे गावो में जहाँ मुसलमानों की जनसँख्या ५-१० घर परिवार ही हो, वहां शानदार पक्की बड़ी मस्जिद स्थापित होना इस्लामी मुल्को और जेहादी संगठनो के पैसो का इन्वोल्वेमेंट दर्शाता हैं। बांग्लादेश को आई एस आई भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही हैं। उन्ही की सहायता से आतंकवाद की खेती की जा रही हैं असम में, सारे भारत में।
स्थानीय नेताओं का प्रश्रय , जेहादी मानसिकता, अल्पसंख्यक वर्ग में बढती असुरक्षा की भावना, शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी, निर्धनता आतंकवाद को स्थापित कर रही हैं ।
अब तो बस प्रतीक्षा हैं, परिवर्तन की । प्रतीक्षा हैं कलयुग के अवतार की।
" यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:, अभ्युथानम् च धर्मश्ये, संभवामि युगे युगे: ॥
उत्तर पूर्वी राज्यों में अवैध्य विदेशियो विशेषकर बंगलादेशी मुशलमानो की संख्या बढती जा रही हैं। अनाधिकार सीमा पार से अनुप्रवेश जारी हैं। कुकुरमुत्तो की तरह मस्जिद और मदर्शे उग रहे हैं। रिमोट इलाको में, गहरे घने जंगलो में बसे गावो में जहाँ मुसलमानों की जनसँख्या ५-१० घर परिवार ही हो, वहां शानदार पक्की बड़ी मस्जिद स्थापित होना इस्लामी मुल्को और जेहादी संगठनो के पैसो का इन्वोल्वेमेंट दर्शाता हैं। बांग्लादेश को आई एस आई भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही हैं। उन्ही की सहायता से आतंकवाद की खेती की जा रही हैं असम में, सारे भारत में।
स्थानीय नेताओं का प्रश्रय , जेहादी मानसिकता, अल्पसंख्यक वर्ग में बढती असुरक्षा की भावना, शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी, निर्धनता आतंकवाद को स्थापित कर रही हैं ।
अब तो बस प्रतीक्षा हैं, परिवर्तन की । प्रतीक्षा हैं कलयुग के अवतार की।
" यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:, अभ्युथानम् च धर्मश्ये, संभवामि युगे युगे: ॥
Saturday, 25 October 2008
आन्च्लिक्तावाद , भारतीय संघीय प्रणाली को चुनौती
महाराष्ट्र में जो हुआ, जो हो रहा हैं, उसका प्रतिउत्तर जो पटना में गूँज रहा हैं वो कत्तई किसी भी राष्ट्र के लिए एक चुनौती हैं। अपने ही देश वासियो पे लाठी चलाना, बन्दूक तान ना किसी भी राष्ट्र के सैनी, सुरक्षा बल के लिए कठिन होता होगा, ये मेरा मानना हैं। मुंबई में ऐसा नही की पुलिस बल नही था, या फ़िर उनका उद्देश्य दंगा रोकना नही था, पर जब अपने ही लोगो पर, अपने भाइयो पर लाठी भांजनी हो तो हाथ कापने लगते हैं। २८.10.२००८ लेकिन महाराष्ट्र पुलिस के haath नही कांपे राहुल raj को किसी खतरनाक आतंकवादी ki तरह एनकाउंटर me ढेर करते। क्या हो रहा हैं देश में ? एक अकेला नौजवान बस में चढ़ता हैं और बस को एक तंमचे से हाइजैक करने की कोशिश करता हैं ? (प्रश्न चिन्ह) । मुंबई पुलिस जिसे आतंकवादियो और दावूद गैंग, ड्रग माफिया और स्थानीय भाइयो से लोहा लेने का अपार अनुभव हैं, क्या राहुल राज को गिरफ्तार नही किया जा सकता था ? क्या उसकी मांगो के मुताबिक पुलिस कमिश्नर से उस्सकी बात नही करायी जा सकती थी। आनन् फानन में राहुल राज का कत्ल बिहारियों और उत्तर भारतीयों की आवाज दबाने की कोशिश हैं।
सोचने की बात ये हैं की पढ़े लिखे छात्र, बुद्धिजीवी, भी बिहारी मराठी जैसे आन्च्लिक्तावादी सोच रखते हैं, और ऐसी विचारधारा बढती जा रही हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री माननीया शीला दीक्षित भी एक बार अपनी ऐसी ही सोच जाहिर
कर चुकी हैं। भारत एक संघीय प्रणाली से गठित हैं, राज्य अलग अलग हैं पर राष्ट्र एक, यहाँ सभी भारतीय नागरीक हैं। चाहे वो किसी भी राज्य से हो , सबको समान अधिकार प्राप्त हैं। मेरा मानना ये हैं की, किसी भी भारतीय को इससे कोई ऐतराज भी नही हैं जब तक कोई राजनैतिक उकसावा ना हो। लेकिन राजनीती बड़ी कुत्ती चीज हैं, इसे और कुछ नजर नही आता सिवा वोट बैंक के।
सोचने की बात ये हैं की पढ़े लिखे छात्र, बुद्धिजीवी, भी बिहारी मराठी जैसे आन्च्लिक्तावादी सोच रखते हैं, और ऐसी विचारधारा बढती जा रही हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री माननीया शीला दीक्षित भी एक बार अपनी ऐसी ही सोच जाहिर
कर चुकी हैं। भारत एक संघीय प्रणाली से गठित हैं, राज्य अलग अलग हैं पर राष्ट्र एक, यहाँ सभी भारतीय नागरीक हैं। चाहे वो किसी भी राज्य से हो , सबको समान अधिकार प्राप्त हैं। मेरा मानना ये हैं की, किसी भी भारतीय को इससे कोई ऐतराज भी नही हैं जब तक कोई राजनैतिक उकसावा ना हो। लेकिन राजनीती बड़ी कुत्ती चीज हैं, इसे और कुछ नजर नही आता सिवा वोट बैंक के।
Wednesday, 15 October 2008
मोली की कहानी
मोली, कितना प्यारा नाम हैं ना ? नन्ही ३ साल की हैं अभी। नाम जैसा प्यारा हैं उतनी ही प्यारी गुडिया सी हैं मोली।
अपने खेल खिलौने से बहुत प्यार हैं उसे। उसका एक सॉफ्ट टेड्डी हैं, जिसे वो बाबु बुलाती हैं, वो बाबु से लिपटकर सोती थी। उसे एक पल भी आंखों से बाबु दूर होता तो वो बेचैन हो जाती थी। रो रोकर बुरा हाल हो जाता था। पर उसके
मम्मी पापा गंदे हैं, मैं नही मोली कहती हैं। मम्मी पापा आपस में लड़ते रहते हैं। उनकी लड़ाई के चक्कर में मोली का बाबु दिल्ली में छूट गया, और पापा भी दिल्ली में रह गए। और मम्मी आ गई अपने मम्मी पापा के पास। पर मोली क्या करे, बाबु से दूर, पापा से दूर?
चाचू की शादी में मोलू दादी के घर आई। पहली बार। हाँ जन्म के तुंरत बाद से hi वो दादी के घर से माँ के घर, माँ के घर से नानी के घर, नानी के घर से अपने पापा के दिल्ली वाले घर, फ़िर मामा के घर, और अब फ़िर माँ के घर... घूम ही रही हैं। लेकिन मोलू से किसी ने नही पूछा की " मोलू कहाँ जाना हैं?" कहाँ रहना हैं ? हाँ मोलू पहली बार दादी के घर आई, जैसे रौनक आ गई हो घर में। नई चाची की उतनी पूछ नही थी, जितनी मोली की थी। पापा भी आए , दादी-दादा, चाची-चाचा, बुआ, और पापा-मम्मी सभी मोली को कितना प्यार करते हैं। मोली बहुत खुश हैं यहाँ सबके साथ, बस एक गम हैं बाबु नही आया उसके चाचू की शादी में। फ़िर भी मोली इतने में भी बहुत खुश थी। सबका साथ जो था। पर फ़िर मम्मी ले गई उसे नानी के घर। मोली समझ कहाँ पाती थी की मम्मी पापा लड़ते क्यूँ हैं, वो छोटी सी जान कैसे समझती जब वो दोनों ही नही समझ पा रहे थे। और हम ही कहाँ समझ गए? बहुत दिमाग पर जोर डालते तो इतना समझ आता की दोनों के विचार नही मिलते, आपस में समझ नही हैं, टेम्परामेंट नही मिल रहे। लेकिन इन सबमे मोली की क्या गलती ? "मोली की कहानी " काफ़ी लम्बी होती जा रही हैं, इसलिए मैंने इसके लिए दूसरा ब्लॉग आरम्भ कर दिया हैं। मोलिकिकहानी.ब्लागस्पाट.कॉम
अपने खेल खिलौने से बहुत प्यार हैं उसे। उसका एक सॉफ्ट टेड्डी हैं, जिसे वो बाबु बुलाती हैं, वो बाबु से लिपटकर सोती थी। उसे एक पल भी आंखों से बाबु दूर होता तो वो बेचैन हो जाती थी। रो रोकर बुरा हाल हो जाता था। पर उसके
मम्मी पापा गंदे हैं, मैं नही मोली कहती हैं। मम्मी पापा आपस में लड़ते रहते हैं। उनकी लड़ाई के चक्कर में मोली का बाबु दिल्ली में छूट गया, और पापा भी दिल्ली में रह गए। और मम्मी आ गई अपने मम्मी पापा के पास। पर मोली क्या करे, बाबु से दूर, पापा से दूर?
चाचू की शादी में मोलू दादी के घर आई। पहली बार। हाँ जन्म के तुंरत बाद से hi वो दादी के घर से माँ के घर, माँ के घर से नानी के घर, नानी के घर से अपने पापा के दिल्ली वाले घर, फ़िर मामा के घर, और अब फ़िर माँ के घर... घूम ही रही हैं। लेकिन मोलू से किसी ने नही पूछा की " मोलू कहाँ जाना हैं?" कहाँ रहना हैं ? हाँ मोलू पहली बार दादी के घर आई, जैसे रौनक आ गई हो घर में। नई चाची की उतनी पूछ नही थी, जितनी मोली की थी। पापा भी आए , दादी-दादा, चाची-चाचा, बुआ, और पापा-मम्मी सभी मोली को कितना प्यार करते हैं। मोली बहुत खुश हैं यहाँ सबके साथ, बस एक गम हैं बाबु नही आया उसके चाचू की शादी में। फ़िर भी मोली इतने में भी बहुत खुश थी। सबका साथ जो था। पर फ़िर मम्मी ले गई उसे नानी के घर। मोली समझ कहाँ पाती थी की मम्मी पापा लड़ते क्यूँ हैं, वो छोटी सी जान कैसे समझती जब वो दोनों ही नही समझ पा रहे थे। और हम ही कहाँ समझ गए? बहुत दिमाग पर जोर डालते तो इतना समझ आता की दोनों के विचार नही मिलते, आपस में समझ नही हैं, टेम्परामेंट नही मिल रहे। लेकिन इन सबमे मोली की क्या गलती ? "मोली की कहानी " काफ़ी लम्बी होती जा रही हैं, इसलिए मैंने इसके लिए दूसरा ब्लॉग आरम्भ कर दिया हैं। मोलिकिकहानी.ब्लागस्पाट.कॉम
Tuesday, 14 October 2008
महिला सशक्तिकरण
आज हमारी महिला मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित का उद्योक्ताओ के नाम एक अपील पढ़ी। उनका अनुरोध था की एम्प्लोयेर्स महिला और अन्य कमजोर वर्ग को रात के समय काम न दे। शाम ७.०० बजे से सुबह ७.०० बजे की पाली में अगर किसी महिला या कमजोर वेर्ग को नियुक्त करना हैं तो सरकार से अनुमति ले।
दिल्ली सरकार का महिला सशक्तिकरण का नारा , वाह शीला जी, मैं आपकी बहुत कद्र करता हूँ, और आपके सफल नेतृत्व की सराहना करता हूँ, पर सौम्या के केश में आपका रवैया बहुत ही गैरजिम्मेदाराना हैं। मैं आपके इस appeal को सौम्या मामले से जोड़ कर देखता हूँ। क्या वो अगर महिला नही होती तो सुरक्षित होती ? मैडम, सिम कार्ड रिचार्ज के लिए दिल्ली में केरोसिन डालकर आग जिसको लगायी गई वो महिला नही पुरूष था। और आर के शर्मा ने शिवानी की हत्या उसके घर में करायी थी, सड़क पे नही। दिल्लीवासियो की सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी हैं, दिल्ली पुलिस की हैं, आप सब अपनी जिम्मेदारियो से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
दिल्ली सरकार का महिला सशक्तिकरण का नारा , वाह शीला जी, मैं आपकी बहुत कद्र करता हूँ, और आपके सफल नेतृत्व की सराहना करता हूँ, पर सौम्या के केश में आपका रवैया बहुत ही गैरजिम्मेदाराना हैं। मैं आपके इस appeal को सौम्या मामले से जोड़ कर देखता हूँ। क्या वो अगर महिला नही होती तो सुरक्षित होती ? मैडम, सिम कार्ड रिचार्ज के लिए दिल्ली में केरोसिन डालकर आग जिसको लगायी गई वो महिला नही पुरूष था। और आर के शर्मा ने शिवानी की हत्या उसके घर में करायी थी, सड़क पे नही। दिल्लीवासियो की सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी हैं, दिल्ली पुलिस की हैं, आप सब अपनी जिम्मेदारियो से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
Wednesday, 8 October 2008
सिंगुर, पश्चिम बंगाल के लिए एक सबक
पश्चिम बंगाल , ब्रिटिश काल में भारत की आर्थिक राजधानी, औद्योगिक केन्द्र, एक समय भारतीय उद्योगपतियो का पसंदीदा स्थान जहाँ वो अपने उद्योग स्थापित करना चाहते थे। वामपंथी नीति और वहां की कामगार यूनियन की यदा कदा मांगे और हड़ताल ने बहुत नुक्सान पहुचाया वहां स्थापित उद्योग धंधो को, और उद्योगपति धीरे धीरे मुख मोड़ने लगे पश्चिम बंगाल से।
टाटा ki महत्वकांक्षी लखटकिया nano कार परियोजना का सिंगुर से सानंद, गुजरात जाना पश्चिम बंगाल के लिए शुभ संकेत नही हैं। ममता बनर्जी के हठधर्मिता ने पश्चिम बंगाल के असंतुष्ट उद्योगपतियों को एक नया रास्ता दिखाया हैं। सिंगुर अपने विकाश के सुनहरे अवसर से हाथ धो बैठा हैं ममता जी की कृपा से। सिंगुर में पश्चिम बंगाल का कोई भला नही हुआ हैं, सिंगुर की जनता को बहकाया गया हैं. एक बात कहूं ममता जी, सिंगुर की जनता आपको कोशेगी भविष्य में। और आज भी आपकी स्थिति कोई अच्छी नही हैं, आप जनमत करवाले सिंगुर में (निष्पक्ष) , मैं कहता हूँ आप कम से कम कुछ दिन मुहँ छिपाए रखेगी, वैसे राजनेताओ की आंखों में बहुत शर्म तो होती नही, थोड़े दिन बाद आप फ़िर वही वोट भीख मांगने निकल पड़ेगी।
कब तक देश की जनता को बरगलाया जायेगा, कब तक देश की जनता लुटती रहेगी ? इन नेताओ की, राजनैतिक महत्व्कंक्षाये सिर्फ़ वोटो की संख्या देखती हैं, और कुछ भी नही। सब कुछ गौण हैं सब कुछ नगण्य हैं वोट के सिवा।
बुद्धदेव ने टाटा को आमंत्रित किया , टाटा आई, जमीं का अधिग्रहण हुआ , ममता को मुद्दा मिला, उन्होंने अपनी राजनैतिक रोटिया सेकी, आमरण अनसन पर बैठी फ़िर जीवित ही उठ गई, सिंगुर में लाशें गिरी, बलात्कार हुआ, ममता को अफ्शोश हुआ, टाटा के कर्मियों के ऊपर आक्रमण होने लगा, ममता अपनी मांगो पर अडी रही, टाटा ने अपने कदम पीछे ले लिए, टाटा ने परियोजना स्थल गुजरात में स्थानांतर कर लिया।
अब ममता तुम बताओ , जिन घरो में लाशें तुमने गिराई हैं , जिन नारियो का तुम्हारी वजह से बलात्कार हुआ हैं, वो घर वाले तुम्हे कैसे माफ़ करेगे ? क्या उनके व्यक्ति जी जायेगे अब, या उस नारी की सामाजिक स्वीकृति आप सुनिश्चित करेगी ? इन सब के लिए जिम्मेदार तुम हो या फ़िर तुम्हारी वोटो की राजनीति । तुम्हारे ऊपर मुक़दमा चलना चाहिए।
कब तक देश की जनता को बरगलाया जायेगा, कब तक देश की जनता लुटती रहेगी ? इन नेताओ की, राजनैतिक महत्व्कंक्षाये सिर्फ़ वोटो की संख्या देखती हैं, और कुछ भी नही। सब कुछ गौण हैं सब कुछ नगण्य हैं वोट के सिवा।
बुद्धदेव ने टाटा को आमंत्रित किया , टाटा आई, जमीं का अधिग्रहण हुआ , ममता को मुद्दा मिला, उन्होंने अपनी राजनैतिक रोटिया सेकी, आमरण अनसन पर बैठी फ़िर जीवित ही उठ गई, सिंगुर में लाशें गिरी, बलात्कार हुआ, ममता को अफ्शोश हुआ, टाटा के कर्मियों के ऊपर आक्रमण होने लगा, ममता अपनी मांगो पर अडी रही, टाटा ने अपने कदम पीछे ले लिए, टाटा ने परियोजना स्थल गुजरात में स्थानांतर कर लिया।
अब ममता तुम बताओ , जिन घरो में लाशें तुमने गिराई हैं , जिन नारियो का तुम्हारी वजह से बलात्कार हुआ हैं, वो घर वाले तुम्हे कैसे माफ़ करेगे ? क्या उनके व्यक्ति जी जायेगे अब, या उस नारी की सामाजिक स्वीकृति आप सुनिश्चित करेगी ? इन सब के लिए जिम्मेदार तुम हो या फ़िर तुम्हारी वोटो की राजनीति । तुम्हारे ऊपर मुक़दमा चलना चाहिए।
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