माँ काश तुमने मुझे सिखाया होता
झूठ बोलने का हुनर
थोडी सी मक्कारी
जीने का तरीका
जो चलता हैं आजकल
चापलूसी करने की कला
मन के हाव भाव
चेहरे तक आने न देने का सऊर
सलीका अनजान बनने का
करके भूल
कम से कम इतना तो सिखाया होता
कैसे कड़वे सच को
मीठा किया जाता हैं .
आज किसीने प्रश्न किया हैं
तेरे प्यारे बेटे से
क्या सिखा हैं तुमने
बताओ ना माँ
क्या जवाब दूं ?
Thursday, 11 June 2009
Tuesday, 9 June 2009
शून्य मेरे दोस्त
मैं शून्य हूँ
तुम भी शून्य हो जाओ
हम जुड़कर भी शून्य
और घटकर भी शून्य
और कोई अगर गुणा करे
तो भी सिफर शून्य
पर कोई बाँटना चाहे हमे
करना चाहे विभाजित
असंभव
हम एक दुसरे से अविभाज्य रहे
हमेशा हमेशा
तुम भी शून्य हो जाओ
हम जुड़कर भी शून्य
और घटकर भी शून्य
और कोई अगर गुणा करे
तो भी सिफर शून्य
पर कोई बाँटना चाहे हमे
करना चाहे विभाजित
असंभव
हम एक दुसरे से अविभाज्य रहे
हमेशा हमेशा
मतदाता, क्रिकेट की बाल
क्रिकेट के बाल को
कभी ये समझ ना आया
की उसकी ये दुर्दशा क्यूँ हैं
क्यूँ फेंका जाता हैं
क्यूँ झन्नाटे से फफेडा जाता
क्यूँ उछाला जाता हैं,
क्यूँ फ़िर थामा जाता हैं
बड़े प्यार से,
चूमता हैं , प्यार से सहलाता हैं
गेंद बाज
बलि के बकरे की तरह।
क्रिकेट के बाल के बिना
रन कैसे बनेगे भाई ?
अगाथा संगमा

केन्द्रीय ग्रामीण विकाश राज्य मंत्री : अगाथा संगमा
हो तो छोटी सी,
सात बहनों के देश से,
महाबाहु ब्रह्मपुत्र ,
मानस और बुडी दीहिंग
कितनी नदिया
जाने कितने ही झील झरने
गारो , जयंतिया,खासी, नागा , पट्कायी
और जाने कितनी छोटी मोटी पहाडिया
गर्वित हैं , आशावादी हैं
कितने कसबे, गाँव कबीले
देखने लगे हैं सपने, खुली आँखों से
मेखला पहने
कितनी हजारो चुलबुली नृत्यान्ग्णाये
देख रही हैं तुम्हारे चेहरे में
अपना रूप ।
Thursday, 28 May 2009
एक्सपेरिमेंट करें ?
आओ कुछ तो नया करे
चलो हम जिंदगी को उलझाते हैं,
लोग कहते हैं की सबसे अहम् रुपैया हैं
हम उसे जरुरत मंदों को बाँट आते
सपने हमने देखे हैं
कुछ धुंधले ख्वाब उसने भी देखे होंगे
कुछ करे की सच हो हर सपना
उन का
अपने ख्वाब ताक पर रख आते हैं
पंडितो को जीमा जीमा कर थक गए
कोई तकदीर ना बदली
इस बार ऑफिस का मुहूर्त
किसी मासूम बच्चे से निकलवाते हैं
रेलवे फाटक के पास जो मलिन बस्ती हैं
वहां से मेहमान बुलाते हैं
चलो थोडी चोरी करते हैं मुस्कराहट
अपने लिए
चलो गमो से दूर चले जाते हैं
तुम्हारे घर के पास
एक अनाथालय हैं
आज ऐतवार हैं, हम पैदल चले
बच्चो को गाड़ी दे आते हैं
चलो हम जिंदगी को उलझाते हैं,
लोग कहते हैं की सबसे अहम् रुपैया हैं
हम उसे जरुरत मंदों को बाँट आते
सपने हमने देखे हैं
कुछ धुंधले ख्वाब उसने भी देखे होंगे
कुछ करे की सच हो हर सपना
उन का
अपने ख्वाब ताक पर रख आते हैं
पंडितो को जीमा जीमा कर थक गए
कोई तकदीर ना बदली
इस बार ऑफिस का मुहूर्त
किसी मासूम बच्चे से निकलवाते हैं
रेलवे फाटक के पास जो मलिन बस्ती हैं
वहां से मेहमान बुलाते हैं
चलो थोडी चोरी करते हैं मुस्कराहट
अपने लिए
चलो गमो से दूर चले जाते हैं
तुम्हारे घर के पास
एक अनाथालय हैं
आज ऐतवार हैं, हम पैदल चले
बच्चो को गाड़ी दे आते हैं
Monday, 18 May 2009
भारत की जनता ने अपनी राजनैतिक परिपक्वता का उदहारण पेश कर दिया। कांग्रेस को मजबूत स्थिति देकर जनता ने साफ़ soothri और स्थिर सरकार के लिए अपना जनादेश दिया हैं। पिछले आम chunaav me sonia गाँधी का tyaag और पूरे karykaal sonia, rahul और priyanka का कुर्सी का मोह न दिखाना iss बार congress को अच्छी badhat दे गया।
Rahul गाँधी और युवा कांग्रेस की नौजवानों को राजनीती में जोड़ने की कोशिस काबिले तारीफ़ हैं । भारतीय राजनीती का आमूल चूल परिवर्तन युवाओ से ही अपेक्षित हैं।
Rahul गाँधी और युवा कांग्रेस की नौजवानों को राजनीती में जोड़ने की कोशिस काबिले तारीफ़ हैं । भारतीय राजनीती का आमूल चूल परिवर्तन युवाओ से ही अपेक्षित हैं।
Friday, 31 October 2008
असम,पर इस्लामी आतंकवाद का हमला
असम, सारा उत्तर पूर्वी भारत हमेशा आतंकवाद का दंश झेलता रहा हैं। पृथकतावादी ताकते इन प्रदेशो में पिछले ४ दशको से काबिज हैं। एन एस सी एन , मिजो नेशनल लिबरेशन फ्रंट , उल्फा, बोडो और दूसरे छोटे छोटे उग्रपंथी दल पिछले सालो में हमेशा आतंकी कारनामे अंजाम देते रहे हैं। पर ३०/१०/२००८ का सीरियल बोम्ब ब्लास्ट पिछले सारे आतंकी गतिविधियो से पृथक हैं। इसबार असम पर इस्लामी आतंकवाद का हमला हुआ हैं जो की गंभीर चिंता का विषय हैं।
उत्तर पूर्वी राज्यों में अवैध्य विदेशियो विशेषकर बंगलादेशी मुशलमानो की संख्या बढती जा रही हैं। अनाधिकार सीमा पार से अनुप्रवेश जारी हैं। कुकुरमुत्तो की तरह मस्जिद और मदर्शे उग रहे हैं। रिमोट इलाको में, गहरे घने जंगलो में बसे गावो में जहाँ मुसलमानों की जनसँख्या ५-१० घर परिवार ही हो, वहां शानदार पक्की बड़ी मस्जिद स्थापित होना इस्लामी मुल्को और जेहादी संगठनो के पैसो का इन्वोल्वेमेंट दर्शाता हैं। बांग्लादेश को आई एस आई भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही हैं। उन्ही की सहायता से आतंकवाद की खेती की जा रही हैं असम में, सारे भारत में।
स्थानीय नेताओं का प्रश्रय , जेहादी मानसिकता, अल्पसंख्यक वर्ग में बढती असुरक्षा की भावना, शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी, निर्धनता आतंकवाद को स्थापित कर रही हैं ।
अब तो बस प्रतीक्षा हैं, परिवर्तन की । प्रतीक्षा हैं कलयुग के अवतार की।
" यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:, अभ्युथानम् च धर्मश्ये, संभवामि युगे युगे: ॥
उत्तर पूर्वी राज्यों में अवैध्य विदेशियो विशेषकर बंगलादेशी मुशलमानो की संख्या बढती जा रही हैं। अनाधिकार सीमा पार से अनुप्रवेश जारी हैं। कुकुरमुत्तो की तरह मस्जिद और मदर्शे उग रहे हैं। रिमोट इलाको में, गहरे घने जंगलो में बसे गावो में जहाँ मुसलमानों की जनसँख्या ५-१० घर परिवार ही हो, वहां शानदार पक्की बड़ी मस्जिद स्थापित होना इस्लामी मुल्को और जेहादी संगठनो के पैसो का इन्वोल्वेमेंट दर्शाता हैं। बांग्लादेश को आई एस आई भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही हैं। उन्ही की सहायता से आतंकवाद की खेती की जा रही हैं असम में, सारे भारत में।
स्थानीय नेताओं का प्रश्रय , जेहादी मानसिकता, अल्पसंख्यक वर्ग में बढती असुरक्षा की भावना, शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी, निर्धनता आतंकवाद को स्थापित कर रही हैं ।
अब तो बस प्रतीक्षा हैं, परिवर्तन की । प्रतीक्षा हैं कलयुग के अवतार की।
" यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:, अभ्युथानम् च धर्मश्ये, संभवामि युगे युगे: ॥
Subscribe to:
Posts (Atom)