Tuesday, 30 September, 2008

शब्द गूम जायेगे, रचना न होगा कविता

शब्द गूम जायेगे रचना ना होगा कविता
भाव थम जायेगे
मन क्षुब्ध होगा
गीत गुंजन
न मधुर कलरव होगा
ऐसा ही होगा
दूषित मन , कुलषित ह्रदय
कंकड़ पत्थरो की कठोर दुनिया में॥

खून खराबो से त्रस्त दुनिया में
रंग- राग, नाच - नृत्य कहाँ ?
विध्वंस का तांडव होगा॥

फूलो की खुसबू मर जायेगी
पौधे कसमसाये से
वायु दम घोटती,
मौसम बदलती दुनिया में
और तड़पता मन, अकेला
प्रेम - बंधुत्व विहीन
भीड़ भरी दुनिया में
प्रदूषित दुनिया में
शब्द गुम जायेगे रचना न होगा कविता॥

अमेरिका से सवाल

हो सकता हैं
तुम बहुत ऊंचे हो
तुमपर विजय ..... ?
तुम अपराजेय

पर तुम्हारी ओर
ऊंचे सर ताकना
या छाती तान चलना
क्या दुस्साहस हैं ?

आत्मभिमान
स्वाभिमान
राष्ट्राभिमान क्या तुच्छ हैं ?
तेरे अहम् , युद्धोन्माद के सामने।