Friday, 31 October, 2008

असम,पर इस्लामी आतंकवाद का हमला

असम, सारा उत्तर पूर्वी भारत हमेशा आतंकवाद का दंश झेलता रहा हैं। पृथकतावादी ताकते इन प्रदेशो में पिछले ४ दशको से काबिज हैं। एन एस सी एन , मिजो नेशनल लिबरेशन फ्रंट , उल्फा, बोडो और दूसरे छोटे छोटे उग्रपंथी दल पिछले सालो में हमेशा आतंकी कारनामे अंजाम देते रहे हैं। पर ३०/१०/२००८ का सीरियल बोम्ब ब्लास्ट पिछले सारे आतंकी गतिविधियो से पृथक हैं। इसबार असम पर इस्लामी आतंकवाद का हमला हुआ हैं जो की गंभीर चिंता का विषय हैं।

उत्तर पूर्वी राज्यों में अवैध्य विदेशियो विशेषकर बंगलादेशी मुशलमानो की संख्या बढती जा रही हैं। अनाधिकार सीमा पार से अनुप्रवेश जारी हैं। कुकुरमुत्तो की तरह मस्जिद और मदर्शे उग रहे हैं। रिमोट इलाको में, गहरे घने जंगलो में बसे गावो में जहाँ मुसलमानों की जनसँख्या ५-१० घर परिवार ही हो, वहां शानदार पक्की बड़ी मस्जिद स्थापित होना इस्लामी मुल्को और जेहादी संगठनो के पैसो का इन्वोल्वेमेंट दर्शाता हैं। बांग्लादेश को आई एस आई भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रही हैं। उन्ही की सहायता से आतंकवाद की खेती की जा रही हैं असम में, सारे भारत में।

स्थानीय नेताओं का प्रश्रय , जेहादी मानसिकता, अल्पसंख्यक वर्ग में बढती असुरक्षा की भावना, शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी, निर्धनता आतंकवाद को स्थापित कर रही हैं ।

अब तो बस प्रतीक्षा हैं, परिवर्तन की । प्रतीक्षा हैं कलयुग के अवतार की।
" यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:, अभ्युथानम् च धर्मश्ये, संभवामि युगे युगे: ॥