Tuesday 9 June 2009

शून्य मेरे दोस्त

मैं शून्य हूँ
तुम भी शून्य हो जाओ
हम जुड़कर भी शून्य
और घटकर भी शून्य
और कोई अगर गुणा करे
तो भी सिफर शून्य
पर कोई बाँटना चाहे हमे
करना चाहे विभाजित
असंभव
हम एक दुसरे से अविभाज्य रहे
हमेशा हमेशा

मतदाता, क्रिकेट की बाल

क्रिकेट के बाल को
कभी ये समझ ना आया
की उसकी ये दुर्दशा क्यूँ हैं
क्यूँ फेंका जाता हैं
क्यूँ झन्नाटे से फफेडा जाता

क्यूँ उछाला जाता हैं,
क्यूँ फ़िर थामा जाता हैं
बड़े प्यार से,
चूमता हैं , प्यार से सहलाता हैं
गेंद बाज
बलि के बकरे की तरह।
क्रिकेट के बाल के बिना
रन कैसे बनेगे भाई ?



अगाथा संगमा


केन्द्रीय ग्रामीण विकाश राज्य मंत्री : अगाथा संगमा

हो तो छोटी सी,
सात बहनों के देश से,
महाबाहु ब्रह्मपुत्र ,
मानस और बुडी दीहिंग
कितनी नदिया
जाने कितने ही झील झरने
गारो , जयंतिया,खासी, नागा , पट्कायी
और जाने कितनी छोटी मोटी पहाडिया
गर्वित हैं , आशावादी हैं
कितने कसबे, गाँव कबीले
देखने लगे हैं सपने, खुली आँखों से
मेखला पहने
कितनी हजारो चुलबुली नृत्यान्ग्णाये
देख रही हैं तुम्हारे चेहरे में
अपना रूप ।