Tuesday, 10 December 2013

करो उद्घोष - करो अधिकार

छद्म रूप में विषधर बैठा 
कमलकुंज के पार 
एक कोने में डायन बैठी 
नख शिख कर तैयार 

खून चूसने वाले पिस्सू 
नेता पदवी पा बैठे हैं 
पेट फुलाए अजगर जैसे 
जाने क्या क्या खा बैठे हैं 

जनता आती हैं का तुम
करो उद्घोष - करो अधिकार

कालसर्प के दोष से
राजनीती का करो उद्धार
छीनो भ्रष्ट हाथ से सत्ता
मातृभूमि यह करे पुकार

जनता आती हैं का तुम
करो उद्घोष - करो अधिकार
झाड़ू फेरो मंसूबो पर

करो सिंहासन पर अधिकार